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इस साल दिवाली में प्रदोष काल की अवधि 2 घंटे 32 मिनट है। लक्ष्मी पूजन प्रदोष काल में करना चाहिए। प्रदोष काल में की गई पूजा सबसे फलदायी मानी जाती है।

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त
शाम 06:27 से लेकर रात को 08: 09 तक
महानिशा काल पूजा मुहूर्त: रात्रि 11:38 से लेकर रात को 12:30 तक

अलग शहरों में मुहूर्त का समय 

लखनऊ: 30 अक्टूबर, शाम -17:20 to 19:56 ,

मुंबई:      30 अक्टूबर, शाम-  17:34 to 20:10

दिल्ली:    30 अक्टूबर, शाम- 17:33 to 20:09

गुड़गाव:  30 अक्टूबर, शाम -18:02 to 20:34

दीवाली पूजा की आवश्यक साम्रगी
दीवाली पूजा के लिए रोली, चावल, पान-सुपारी, लौंग, इलायची, धूप, कपूर, घी या तेल से भरे हुए दीपक, कलावा, नारियल, गंगाजल, फल, फूल, मिठाई, दूर्वा, चंदन, घी, मेवे, खील, बताशे, चौकी, कलश, फूलों की माला, शंख, लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति, थाली, चांदी का सिक्का, 11 दिए आदि वस्तुएं पूजा के लिए एकत्र कर लेना चाहिए.

दीवाली के दिन कैसे करें पूजा…
– स्कंद पुराण के अनुसार कार्तिक अमावस्या के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर सभी देवी देवताओं की पूजा करनी चाहिए.
– शाम के समय पूजा घर में लक्ष्मी और गणेश जी की नई मूर्तियों को एक चौकी पर स्वस्तिक बनाकर स्थापित करना चाहिए.
– मूर्तियों के सामने एक जल से भरा हुआ कलश रखना चाहिए. इसके बाद मूर्तियों के सामने बैठकर हाथ में जल लेकर शुद्धि मंत्र का उच्चारण करते हुए उसे मूर्ति पर, परिवार के सदस्यों पर और घर में छिड़कना चाहिए.
– अब फल, फूल, मिठाई, दूर्वा, चंदन, घी, मेवे, खील, बताशे, चौकी, कलश, फूलों की माला आदि सामग्रियों का प्रयोग करते हुए पूरे विधि-विधान से लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा करनी चाहिए.
– इनके साथ-साथ देवी सरस्वती, भगवान विष्णु, मां काली और कुबेर की भी विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए.
– पूजा करते समय 11 छोटे दीप और एक बड़ा दीप जलाना चाहिए.

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