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सरकार बनाने को लेकर हर किसी के अपने दावे हैं। राजनीति के पंडित अपने-अपने अनुभव के आधार पर अनुमान लगा रहे हैं, लेकिन सटोरिए इन सब पर भारी हैं। सट्टा मार्केट में शुरुआती दौर में पीछे रहने वाली बीजेपी ने बढ़त ली है, तो साइकल गठबंधन पीछे-पीछे है। हाथी का सही से खड़ा भी न हो पाना चौंकाता है।

भाव चढ़ता-गिरता रहा

सूत्रों के मुताबिक पूर्वांचल के सट्टा बाजारों में चुनाव के पहले चरण के नामांकन तक 210 से 215 सीटों के साथ एसपी -कांग्रेस गठबंधन को पूर्ण बहुमत के दावे किए जा रहे थे। वोटिंग का दौर आया तो हर चरण में बीजेपी समेत गठबंधन और बीएसपी का भाव विदेशी बाजार में क्रूड ऑयल की तरह गिरता-चढ़ता रहा।

अंतिम दौर में सट्टा बाजार में ‘कमल’ ब्रैंड का जोर दिखा। तीसरे राउंड तक पीछे रहने वाली बीजेपी को गुरुवार को खुले नए भाव में 188 से 190 और एसपी गठबंधन को 125 से 130 तक सीटें मिलने की संभावना पर बनारस में ही 25 करोड़ से ज्यादा का सट्टा लगा है।
बीएसपी को सट्टेबाजों ने शुरुआती दौर से ही अंडर एस्टिमेट किया। बीएसपी के लिए कभी सौ से ज्यादा का भाव खुला ही नहीं और अंतिम दौर में 80 पर टिका तो टिक ही गया। हालांकि राजनीति के जानकार इससे इत्तेफाक नहीं रखते हैं। इनकी मानें तो बीएसपी दलित-मुस्लिम वोटों की गठरी से ‘साइलेंट किलर’ के रूप में सामने आ सकती है।

सट्टा मार्केट से चिंता
चुनाव के हर चरण में वोटों की बारिश के बावजूद सट्टा मार्केट में बीजेपी की सीटें 190 से आगे न बढ़ने पर बीजेपी नेताओं के चेहरे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। एक बड़े नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि हम तो 220 से 230 सीटें मानकर चल रहे हैं, लेकिन सट्टा मार्केट है कि अधर में लटकाए हुए है।

 

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